TI102

चिंतनशील सूफीवाद (ज़िक्र, तरीक़ा, वज्द)

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SOU

आध्यात्मिक प्राप्ति का एक मार्ग (तरीक़ा) जिसका उद्देश्य ईश्वर के स्मरण और हृदय (क़ल्ब) के जागरण के माध्यम से व्यक्ति का समग्र परिवर्तन है, जो भाईचारे के भीतर मास्टर (मुर्शिद) से शिष्य (मुरीद) तक प्रेषित होता है। इसके मुख्य सिद्धांत हैं ज़िक्र (स्मरण), फ़ना (अहंकार का विलोपन) और बक़ा (ईश्वर में बने रहना), वज्द (परमानंद), महब्बा (दिव्य प्रेम) और नफ़्स का क्रमिक परिवर्तन। इसकी तकनीकों में मौखिक या मौन ज़िक्र, समा (आध्यात्मिक श्रवण), मेवलेवी चक्कर नृत्य, खल्वा (एकांत) और सामूहिक हदरा शामिल हैं। चिकित्सीय स्तर पर यह तनाव प्रबंधन, चिंता, हल्के अवसाद, शोक और पहचान की खोजों के साथ प्रतिच्छेद करता है, विशेष रूप से मुस्लिम संस्कृति के रोगियों के लिए, मनोरोग विघटन के मामलों में परमानंद अभ्यासों के विपरीत संकेत के साथ।

कोडTI102
नाम (HI)चिंतनशील सूफीवाद (ज़िक्र, तरीक़ा, वज्द)
फ़्रेंच नामSoufisme Contemplatif (Dhikr, Tariqas, Wajd)
संक्षिप्त नाम (FR)SOU
संस्थापकTradition mystique de l'islam (tasawwuf) : Rabi'a al-Adawiyya, al-Ghazali, Ibn Arabi, Rumi (ordre Mevlevi) ; soufisme occidentalisé : Inayat Khan
वर्षémergence dès le VIIIe-IXe siècle ; grandes tariqas du XIIe au XIVe siècle
स्कूल / लहरDimension intérieure et mystique de l'islam ; tariqas (Naqshbandiyya, Qadiriyya, Chistiyya, Mevlevi)
स्रोत खंडMémento des Psychothérapies का खंड 8
लेखक और विचारक
Rabi'a al-Adawiyyaal-GhazaliIbn ArabiInayat KhanRumi

इस चिकित्सा का विस्तृत विवरण (सिद्धांत, संकेत, प्रोटोकॉल, प्रमाण का स्तर) Mémento des Psychothérapies के खंड 8 में दिया गया है। खंड देखें